कॉर्निया के प्रत्यारोपण से हो सकता है आंखों के कई संवेदनशील बीमारियों का इलाज? कैसे सुरक्षित रख सकते हैं अपनी आंखों के कॉर्निया को? किस तरह से संभव है यह पूरी प्रक्रिया? Can corneal transplants help to cure many sensitive diseases of the eyes? How can the cornea of your eyes be kept safe? How is it possible to complete this process?

नेत्रदान से मिले कॉर्निया के प्रत्यारोपण से कई गंभीर नेत्र बीमारियों से गुजर रहे लोगों को बहुत लाभ मिलता है ऐसे लोग जो दुनिया को देखने के लिए सिर्फ एक कॉर्निया के मिलने का इंतजार करते-करते गुजर जाते हैं लेकिन उन्हें कॉर्निया नहीं मिल पाता। ऐसे लोगों की संख्या बहुत ही अधिक मात्रा में है जो कि कॉर्निया के इंतजार में है तथा इसके ठीक विपरीत देने वालों की संख्या बहुत ही कम।
 कैसे होता है नेत्र प्रत्यारोपण? 
How is eye implants?
how is eye implants?

हमारे नेत्र के ऊपर के सबसे सामने पारदर्शी परत को ही कॉर्निया कहा जाता है इसे दानकर्ता के मृत्यु के बाद बेहद सावधानी के साथ इसे आंखों से निकालकर किसी जरूरतमंद व्यक्ति के खराब कॉर्निया को निकालकर इसे उसकी जगह पर प्रत्यारोपित किया जाता है। कॉर्निया में सबसे अहम बात की कॉर्निया जब तक पारदर्शी होती हैं सब कुछ बढ़िया दिखाई पड़ता है परंतु जब यह सफेद होने लगते हैं तो नजर धुंधली दिखने शुरू हो जाती है।

 चोट लगने से खराब हुई आंखों के लिए वरदान? 
Burden for damaged eyes due to injury?
burden for damaged eyes due to injury?

अगर किसी व्यक्ति को किसी कारण से एक्सीडेंट या किसी कारखाने, उद्योगों में कार्य के दौरान करने में कार्निया में किसी प्रकार का कोई चोट लग जाए तो ऐसी स्थिति में हो सकता है कि वह फट जाए ऐसे में डॉक्टरों द्वारा सील कर तो ठीक कर दिया जाता है परंतु उसकी पारदर्शिता कम हो जाती है,
 इसके अलावा किसी प्रकार का कोई निशान या दाग भी बन सकता है जिससे मरीज को सही तरीके से देखने में परेशानी होती है और मरीज के कार्निया का आकार भी बिगड़ जाता है इस तरह व्यक्ति की कार्निया के सही ढंग से फोकस बनाने में भी काफी बाधा उत्पन्न होती है परंतु अगर व्यक्ति के कॉर्निया के अंदरूनी हिस्से सही सलामत हो तो खराब हुए कॉर्निया को किसी स्वस्थ कॉर्निया से बदलकर इसे ठीक किया जाता है जिससे व्यक्ति की देखने की दृष्टि पुनः नॉर्मल हो जाती है।

 किसी रोग या संक्रमण के कारण भी खराब हुई आंखों में? 
Due to any disease or infection too, in the eyes?
due to any disease or infection too, in the eyes?

ऐसे व्यक्ति जिनके आंखों के कॉर्निया किसी प्रकार की संक्रमण या इंफेक्शन के कारण कॉर्निया में सफेद पन जैसा आ जाता है तथा नजर से कुछ साफ़ दिखाई नहीं देता है, इसे हम कार्निया अल्सर भी कह सकते है अधिकतर मामलों में खेती किसानी कर रहे व्यक्तियों के आंखों में किसी कारणवश धूल, मिट्टी या फिर किसी पेड़ शाखा की टहनी के लग जाने से भी आंखों में गंभीर संक्रमण का खतरा और अधिक बढ़ जाता है और इस परिस्थिति में किसी घरेलू उपचार या सस्ती स्टेरॉयड ड्राफ्ट यूज करने पर भी यह गंभीर रूप से और बड़ सकता है जिसे रोक पाना लगभग नामुमकिन हो जाता है,

कई-कई केस में यह भी देखा गया है कि संक्रमण के गंभीर रूप लेने के बाद कॉर्निया बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाता है और आंख की अंदरुनी हिस्से का बाहर आ जाने का खतरा भी लगा रहता है इस परिस्थिति में केवल एक ही समाधान शेष रह जाता है जो कॉर्निया के प्रत्यारोपण से ही संभव हो सकता है ट्रीटमेंट द्वारा मरीज के इन्फेक्शन को खत्म कर दिया तथा दिख रहा सफेद पन को भी हटा कर फिर से सृष्टि प्रदान किया जाता है।

 पूरी तरह से भर चुके मोतियाबिंद में? 
In a completely filled cataract?
in a completely filled cataract?

ज्यादातर बुजुर्ग मरीजों के केस में मोतियाबिंद का ज्यादा समय तक आंखों में बने रहना तथा तथा इस मोतियाबिंद का गहराजाना ऑपरेशन की प्रक्रिया में कई प्रकार की समस्याओं को उत्पन्न करता है इस तरह की सर्जरी में कॉर्निया के पीछे हिस्से में सेल्स की मात्रा कम हो जाती है जिसे हम एंडोथिलियल सेल्स कहते हैं इन सेल्स की मुख्य भूमिका यह होती है कि यह कॉर्निया को पारदर्शी बनाए रखने में मदद करते है और जब इन्हीं की मात्रा कम हो जाती है तो कॉर्निया सफेद होना शुरू हो जाता है तथा गड़न भी महसूस होता है। और आंख में बार बार पानी आने लगता है ऐसी स्थिति में दान किए गए कॉर्निया के पीछे के सेल्स को खराब सेल्स के साथ बदल दिया जाता है इस प्रोसेस को एंडोथिलियल केरेटोप्लास्टि कहते हैं।

 मुख्यता दो प्रकार की होती हैं एंडोथिलियल केरेटोप्लास्टि? 
There are two main types of endothelial keratoplasty?
there are two main types of endothelial keratoplasty?

इसमें यह मुख्यता दो प्रकार की होती हैं पहला DMEK और  दुसरा DSEK इन दोनों ही प्रक्रियाओं में चिरफाड और टांके की संभावना कम से कम होता है और दो ढाई महीनों में ही नजर सामान्य हो जाती है अगर किसी व्यक्ति की आंखों में मोतियाबिंद काफी लंबे समय से है तथा यह पक्का हो गया हो तो ऐसी स्थिति में सिर्फ सेल्स को बदलने से दृष्टि सामान्य नहीं हो पाएगी इसके लिए पूरी कॉर्निया को ही बदलने की जरूरत पड़ती है इस सर्जरी के दौरान कॉर्निया में 16 से अधिक टांके  लगाए जा सकते हैं जो साल डेढ़ साल के अंदर निकालना भी पड़ता है इन टांको की वजह से मरीज को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है ऐसी स्थिति में मरीज को काफी सावधानी रखने की जरूरत पड़ती है तथा नियमित जांच की भी आवश्यकता होती है।

 चूना भी एक कारण हो सकता है? 
Lime can also be a reason?
lime can also be a reason?

मनुष्य के सामान्य आंखों में कॉर्निया के सतह को साफ और सुरक्षित रखने के लिए स्टेम सेल्स की एक परत होती है जो आंख में किसी कारणवश चुना या ऐसा कोई केमिकल के चले जाने पर यह इस परत को खराब कर देते हैं, इस परिस्थिति में भी कॉर्निया के इन स्टेम सेल्स को किसी दान में दिए गए कॉर्निया के नए स्टेम सेल से रिप्लेस करके इन्हें पुनः स्वस्थ किया जा सकता है।


 आंखों को ज्यादा खुजलाने पर भी बदल सकता है कॉर्निया का आकार? 
Can cornea size change even more in eyes?
can cornea size change even more in eyes?

सामान्यतः बच्चों की आंखों में किसी संक्रमण या इंफेक्शन के कारण खुजली हो जाना सामान्य बात है परंतु इस खुजली के बढ़ जाने से तथा बार-बार खुजलाने से कार्निया के आकार में भी बदलाव आ सकते हैं और उन्हें सिलेनड्रिकल नंबर के चश्मे भी लगते हैं और एक समय ऐसा भी आता है कि कॉर्निया की परत कुछ ज्यादा पतली हो जाती है और आकार कुछ ज्यादा ही बिगड़ जाता है तो ऐसी स्थिति में चश्मा में भी नजर साफ दिखाई नहीं देता और सब कुछ धुंधला-धुंधला सा दिखाई देने लगता है इस बीमारी को केरेटोकोनस कहते हैं,

कॉर्निया के आकार को और बिगड़ने से बचाने के लिए क्रॉसलिंकिंग ऑपरेशन किया जाता है और पुनः सामान्य देखने के लिए सूटेबल कांटेक्ट लेंसेस दिए जाते हैं। परंतु केरेटोकोनस बीमारी की वजह से कॉर्निया कुछ ज्यादा ही पतला हो गया हो तो उसे बदलना ही एक शेष उपाय रह जाता है इस बीमारी में भी आंखों में एंडोथिलीयल नामक सेल सुरक्षित रहता है और इसे बचाते हुए ही प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को किया जाता है इसे लेमल्लर केरेटोप्लास्टि कहां जाता है, इस प्रणाली में अपने ही शरीर द्वारा नई कॉर्निया को रिजेक्ट कर देने की संभावना लगभग नहीं के बराबर होती है।


 कद्र करें इस अनमोल उपहार की? 
Do the valor of this precious gift?
do the valor of this precious gift?

नेत्रदान की अनमोल उपहार के प्रत्यारोपण तक सभी लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है इनमें पहले वह लोग आते हैं जो अपने किसी प्रियजन की मृत्यु के पश्चात उनके नेत्र को दान करने के लिए राजी होते हैं और आई बैंक में उपस्थित कर्मचारियों की कर्मठता एवं अपने कार्य को सही तरह से पूरा करने की जिम्मेदारी भी इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाते हैं जिनके निस्वार्थ सेवा भाव से यह संभव हो सकता है और मरीज को भी इस अनमोल उपहार की मर्यादा को बनाए रखना चाहिए और किसी भी समस्या एवं  नियमित जांच के लिए तत्पर रहने की आवश्यकता है कॉर्निया प्रत्यारोपण विशेषज्ञों को इस जटिल ऑपरेशन को करने से तथा मरीज को धैर्य एवं सावधानी पूर्वक इन सारी परिक्रियाओ की संवेदनशीलता के विषय से अवगत करना चाहिए।


Previous
Next Post »