किडनीयों में उत्प्पन होने वाले गंभीर समस्याऐ? और आप इसका उपचार कैसे कर सकते है? क्या है पूरी प्रक्रिया? Critical problems that occur in the kidneys? And how can you treat it? What is the whole process?

आज हमारे देश में ऐसे लोगों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है जिसके किडनी पूरी तरह से डैमेज हो चुकी है आज 5 लाख से भी अधिक मरीज हमारे देश में ही हैं और यह तादाद एक लाख प्रति वर्ष के हिसाब से बढ़ती जा रही है देश में प्रत्येक 2500 परिवार में से एक परिवार ऐसा होता है जो किडनी के किसी गंभीर रोग से ग्रसित हो, पर दुख इस बात का भी है कि उनमें से तकरीबन 2 से 3% मरीजों को ही सही इलाज मिल पाता है आइए समझते हैं किडनी से जुड़ी इन समस्याओं और उनके निदान के उपायों के बारे में?
 किडनी की कार्यप्रणाली? 
Kidney functioning?
kidney functioning?

हमारी दोनों किडनीया हमारे जीवन को सुचारु रुप से चलाने के लिए दिन रात काम में लगी रहती हैं यह अनावश्यक पदार्थों तथा तरल पदार्थों शरीर से बाहर निकालने एवं खून को साफ करने का काम करते हैं तथा खून में जरूरी खनिज पदार्थ लवण एवं धातु की संतुलित मात्रा को भी नियंत्रित रखते हैं यह किडनी या हमारे रक्त दाब को भी नियंत्रित करने का काम करते हैं जो हमारे शरीर में पानी के लेवल को भी संतुलित रखने का काम करते हैं इसीलिए आपने देखा होगा जिसकी किडनियां खराब होती हैं उनका शरीर में सूजन आने लगता है, यह किडनियां लाखों छन्नियों एवं तकरीबन 140 मील लंबी नलिकाओं से मिलकर बने होते हैं यह नलिकाएं छने हुए तरल पदार्थों में से शरीर के लिए आवश्यक एवं जरूरी पदार्थों जैसे पोटेशियम, कैल्शियम, सोडियम आदि को सोखती हैं तथा 1.2 से 1.5 लीटर तरल मूत्र के रूप में शरीर से बाहर विसर्जित कर देती हैं।

 किडनियों से संबंधित समस्याएं? 
Problems related to kidneys?
problems related to kidneys?
किडनियों में होने वाली समस्याओं को आम नहीं समझना चाहिए इन समस्याओं से केवल किडनी की कार्य प्रणाली पर प्रभाव नहीं पड़ता बल्कि पूरे शरीर की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।

क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) -
Chronic Kidney Disease (CKD) -
chronic kidney disease (ckd) -

सीकेडी को एस्टेनब्लिश रीनल फेलियर ( e r f ) या एंड स्टेट किडनी डिसीज भी कहते हैं इस बीमारी में गुर्दे की सामान्य कार्य प्रणाली धीरे-धीरे कम होना शुरू हो जाती है गुर्दे सही ढंग से अपने कार्य को करने में असक्षम होती है और इस बीमारी से ग्रसित (सीकेडी) के चपेट में आए ऐसे मरीजों को हॉस्पिटल तब ले जाया जाता है जब उनकी गुर्दे की पूरी कार्यक्षमता घटकर सिर्फ आधी के करीब रह जाती है। अगर इस रोग को शुरुआत में ही समझ लिया जाए जो इसे दवाइयों तथा मामूली ट्रीटमेंट से ही बढ़ने से रोका जा सकता है।

किडनी का संक्रमण? -

किडनियों के अधिकतर होने वाला संक्रमण को पायलोनेफ्रिटिस भी कहते हैं इस संक्रमण का मुख्य कारण गुर्दे में उपस्थित पथरी भी हो सकती है इस कारण मूत्र को सही ढंग निकासी में रुकावट आती है तथा मूत्र में रूकावट के कारण पुनः वापस किडनी की ओर प्रवाहित हो जाता है इस स्थिति में किडनी में संक्रमण जैसी स्थिति उत्पन्न होना शुरू हो जाती है लेकिन ज्यादातर किडनी और मूत्र मार्ग के अधिक्तर लगभग 85% संक्रमण का मुख्य कारण ई-कोलाई और अन्य हानिकारक बैक्टीरिया जिम्मेदार होते हैं।

किडनी(गुर्दे) फेलियर? -

समय के साथ अगर सही ट्रीटमेंट नहीं कराया जाए तो यह रोग गंभीर रूप ले लेता है और इसके कारण किडनी फेलियर जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है आमतौर पर हम किडनी फेलियर उस संभावित स्थिति को कहते हैं जिसमें गुर्दे की सामान्य कार्य क्षमता घटकर लगभग 15% ही शेष रह जाती है इस स्थिति से निपटने का एक मात्र रास्ता डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट ही शेष बच जाता है।

ग्लोमेरुलोनेफ्रीटाइटिस ? -

ग्लोमेरुलोनेफ्रीटाइटिस विभिन्न प्रकार के रोगों का एक संयुक्त समूह है। इस रोग में ज्यादातर किडनियों के फिल्टरिंग के तंतुवो में सूजन आ जाती है और वह गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो जाता है तथा किसी भी अन्य डिसऑर्डर के के मुकाबले यह किडनी डिसीज में नंबर 3 पर आने वाला एक सामान्य प्रकार का डिसऑर्डर है।

पॉलिसिस्टिक किडनी डिसीज? -

यह किडनी डिजीज मुख्य रूप से अनुवांशिक रोग के रूप में पाया जाता है इस रोग के कारण है किडनी के भिन्न भिन्न हिस्सों में सिस्ट बनने लगते हैं और उसके आसपास उपस्थित ऊत्तक मरने लगते हैं।

 किडनी से संबंधित समस्याओं के लिए कई उपचार मौजूद हैं? 
There are many treatments for kidney related problems?
there are many treatments for kidney related problems?
डायलिसिस? -

डायलिसिस एक तरह की प्रक्रिया को कहते हैं जो कि स्वस्थ किडनी की तरह ही कार्य करती है इस प्रक्रिया के द्वारा ही शरीर में उपस्थित व्यर्थ के पदार्थों को शरीर से बाहर किया जाता है इसमें इलेक्ट्रोलाइट का सही संतुलन बनाए रखा जाता है डायलिसिस प्रक्रिया को कई वर्षों तक चलाया जा सकता है या फिर कुछ दिनों के लिए भी जब तक कि सही किडनी का प्रत्यारोपण नहीं हो जाता।

हीमोडायलिसिस? -

इस प्रक्रिया में आर्टिफिशियल किडनी के द्वारा मशीन से खून साफ किया जाता है इस प्रक्रिया में इनपुट और आउटपुट के लिए पाइप नुमा सुइयों के द्वारा खून को साफ किया जाता है, इसमें इनपुट सुई से गंदा खून आर्टिफिशियल किडनी तक खून को पहुंचाता है जहां उसकी साफ करने की प्रक्रिया होती है तथा आउटपुट सूई द्वारा साफ खून को शरीर में वापस भेज दिया जाता है। इसमें मरीज को इस प्रक्रिया को हफ्ते में दो से तीन बार कराना आवश्यक होता है और यह पूरी डायलेसिस प्रक्रिया को सही तरीके से पूरा होने में लगभग 4 से 5 घंटे का समय लग सकता है।

कंटीन्यूअस एम्बुलेट्री?
पेरिटोनियल डायलिसिस...!! ( सीएपीडी ) -
peritoneal dialysis...!! (CAPD) -
peritoneal dialysis...!! (capd) -

इस डायलिसिस प्रक्रिया को घर पर ही किया जा सकता है इसमें पेट में उपस्थित झिल्लियां फिल्टर का काम करती हैं इस प्रक्रिया में पेट की दीवारों से लगकर एक नली लगा दी जाती है जिससे कैथेटर कहते हैं इस कैथेटर नली के द्वारा एक विशेष प्रकार का घोल जिससे कि रक्त शुद्ध हो सके  पेट में उपस्थित पेरिटोनियल तक पहुंचाया जाता है इस घोल में ऐसे कुछ रसायन होते हैं जिससे यह गंदे विषैले पदार्थों को आसानी के साथ सोख लेते हैं। यह पूरी प्रक्रिया को 24 घंटे में लगभग तीन से चार बार करने की आवश्यकता पड़ती है। घोल के पुराना हो जाने पर उसे निकालकर पुनः वापस नए घोल डाल दिया जाता है जिसमें तकरीबन 30 से 40 मिनट का समय लग सकता है।

ऑटोमेटिक पेरिटोनियल डायलिसिस ( ए पी डी ) -

यह प्रक्रिया लगभग-लगभग पेरिटोनियल डायलिसिस प्रक्रिया की तरह ही होती है इसमें ऑटोमेटिक मशीन के द्वारा पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है इसमें मशीन में ही द्रव की थैली एवं नलिकाएं को एक साथ जोड़ दिया जाता है तथा सोने से पूर्व नलिकाओं को पेरिटोनियल कैथरीन नलिका के साथ अच्छी तरह से जोड़ते हैं ताकि मशीन आसानी के साथ रात के समय खून को साफ करने की प्रक्रिया करती रहती है और मरीज बिना किसी झंझट के आराम से नींद ले सकता है। इस ऑटोमेटिक डायलिसिस प्रक्रिया की खास बात यह है कि इसमें बार-बार घोल बदलने की जरूरत नहीं पड़ती।

गुर्दा का प्रत्यारोपण? -
इस प्रक्रिया में किसी दान किए गए स्वस्थ किडनी से खराब हुए किडनी को बदला जाता है और ऑपरेशन के सफल पूर्वक हो जाने के बाद मरीज को लगभग 10 से 15 दिन हॉस्पिटल में ही रहने की सलाह दी जाती है इसके विपरीत दानकर्ता जिसकी किडनी निकाली गई है उसे 3 से 7 दिन में ही डिस्चार्ज किया जा सकता है। व्यक्ति तीन से चार महीनों के अंदर फिर से एक सामान्य जिंदगी जीना शुरु कर देता है। एक बार सफलतापूर्वक गुर्दे के प्रत्यारोपण के बाद कभी भी डायलिसिस की प्रक्रिया करने की आवश्यकता नहीं रहती है।

 Short Summary :- 

 गुर्दे की समस्याओं के क्या हो सकते हैं कारण? -
What can be the cause of kidney problems? -
what can be the cause of kidney problems? -

यूं तो गुर्दे के खराब होने या किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने के कई सारे कारण हो सकते हैं लेकिन इनमें जो सबसे महत्वपूर्ण कारण हैं यह निम्न प्रकार से हैं -

-  हाई ब्लड प्रेशर,
-  रजत भस्म और स्वर्ण भस्म युक्त देसी दवाइयों के प्रयोग से,
-  मूत्र संस्थान में पथरी,
-  डायबिटीज,
-  पेन किलर तथा अन्य कई प्रकार के दवाइयों के अत्यधिक, मात्रा में सेवन से,
-  मोटापा,
-  प्रोस्टेट की बीमारियों से,
-  कोलेस्ट्रोल का सामान्य से ज्यादा बढ़ने से,

 क्या होते हैं इसके लक्षण? 
What are its symptoms?
what are its symptoms?

गुर्दे की बीमारियों के कारण कई प्रकार की लक्षण सामान्य तौर पर दिखाई पड़ते हैं ऐसे ही कुछ लक्षण जो समानता गुर्दे की बीमारी में खासतौर पर देखे गए हैं इनमें शामिल है -

-  भूख में कमी आ जाना,
-  हड्डियों का कमजोर होना,
-  बार बार उल्टी तथा मितली जैसा महसूस होना,
-  शरीर में सूजन हो जाना,
-  खून की कमी,
-  दिन भर थकान और कमजोरी महसूस करना,
-  हल्के-फुल्के काम में भी सांस जल्दी चल जाना,
-  मूत्र की सामान्य मात्रा में गिरावट आ जाना,
-  ब्लड प्रेशर का अधिक बढ़ जाना,
-  तथा मूत्र में खून का आना,

 उपचार? 
the treatment?
the treatment?

किडनी रोग के हो वैसे तो हमारे देश में लाखों की मात्रा में लोग हैं लेकिन इसका सही ढंग से इलाज बहुत कम लगभग 2 से 3% ही करा पाते हैं, इसके मुख्य रूप से तीन कारण है पहला वह लोग जिन्हें यह पता ही नहीं लगता कि उन्हें किसी प्रकार की गुर्दे से संबंधित बीमारी भी है और दूसरा कि हमारे देश में ऐसे हॉस्पिटल बहुत कम है जहां गुर्दे की समस्याओं का इलाज सही तरीके से हो सके और तीसरा सबसे महत्वपूर्ण कारण कि इस बीमारी का इलाज बहुत ज्यादा महंगा है जो एक सामान्य मिडिल क्लास व्यक्ति के लिए लगभग असंभव है।

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